कामयाबी की सीढिया

आज के दौर में सभी लोग सफल होना चाहते है। लेकिन किसी को पता नहीं है कि सफलता किस चिड़िया का नाम है।
छोटे शिशु के लिए अपने पैरो पर खड़ा होना सफलता है तो बुजुर्ग के लिए अपने काम स्वंयम कर पाना सफलता है।
विद्यार्थी के लिए परीक्षा में अच्छे अंक लाना सफलता है तो जवान के लिए जीविका उपार्जन सफलता है। एक व्यापारी के लिए सेल्स टर्न ओवर बढ़ना सफलता है तो राजनेता के लिए प्रसिद्धि सफलता है। इस तरह से हम समझ सकते है सभी को किसी न किसी रूप से सफलता चाहिए ही चाहिए।

लेकिन सफलता मिले कैसे। काश ये कोई बाजार में मिलने वाली कोई वस्तु होती जिससे हम कुछ रूपए देकर प्राप्त कर लेते। लेकिन समस्या काफी विकट है। दुनिया में ऐसी कोई दुकान नहीं है जहा सफलता किलो के भाव मिल जाये। लेकिन मेने ये दुकान खोज निकाली है। यदि आप भी सफलता खरीदने के इच्छुक है तो नीचे दिए एड्रेस पर संपर्क करे।

पता है – आपका अंतर्मन

जी हां सही पढ़ा आपने आपका अंतर्मन। आप अपने मन से पूछिए वो चाहता क्या है। क्या जो वो चाह रहा है वो आपको चाहिए। यदि जवाब हां है तो लग जाएये धार पर।
अब आप को पता चल चुका है आपके लिए सफलता क्या है। इस सफलता को प्राप्त करने के लिए आपको सिर्फ तीन चीजे चाहिए जोश जरुरत और जूनून। जब भी आप कोई काम आरम्भ करे तो आपका जोश एक्सपोंटियल होना चाहिए माने शुरू में लोगो जोश ही जोश में काम शुरू कर लेते है , दिमागी रूप से ठान लेते है , सरे सपने देख लेते है लेकिन आगे करते कुछ नहीं। जो निर्णय आपने लिया है उसे पूरा करने के लिए आपको काम तो करना पड़ेगा , दर्द लेना होगा। जिंदगी भर अफ़सोस का दर्द लेने से कई गुना अच्छा है संघर्ष और म्हणत का दर्द। एक बार इस दर्द का मजा ले लिया तो जिंदगी भर इस दर्द के लिए दर्द लेने में मजा आने लगेगा। शारीरिक रूप से कष्ट लोगे तभी तो मानसिक रूप से लिए गए निर्णय के साथ न्याय होगा। जोश को बनाये रखने के लिए आत्मा उत्सहित होते रहो। अच्छी किताबे , सफल लोगो को पढ़ो नियमित पढ़ो। लक्ष्य को निर्धारित करके अपने आप से बार करो। अपने मन को अपने शरीर को आदेश दो काम करो तभी शाम को पगार मिलेगी। चार्ज होते रहो काम करते रहो। जब लगे निराशा हाथ तो फिर से चार्ज होकर लग जाओ काम पर। बस अपने काम पर ठीके रहो सफलता निश्चित है वो तो मिलेगी ही। बस इस जोश को काम न होने देना। जब शरीर थक जाये तो उसे आदेश दे देना काम करने के लिए। अपने मालिक स्वंयम बनो खुद को खुद आदेश दो। सफलता निश्चित है।
कामयाबी का दूसरा सूत्र है जरुरत। सफल वही आदमी हो सकता है जिसको जरुरत है सफलता की। भूखा आदमी जो भूख का दर्द समझता है वही भोजन का मूल्य समझता है। आपको मिलने वाली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपको उसकी जरुरत कितनी है। बिना जरुरत के कुछ नहीं मिलने वाला। हमे जरुरत थी तो हमने कार बनायीं , मोबाइल बनाया , आग जलाई और जरुरत हुई तभी तो आप इस दुनिया में आये। अपनी जरुरत को इतना बड़ा कर लो की इसके बिना आप ना रह पाओगे। मोहब्बत कर लो अपने निर्णय से आपकी सफलता है। तुझे तो कैसे भी कर के पाना है। तू ना मिली तो में जी न पाउँगा। अपनी आप को तैयार कर लो अपने आप से युद्ध करने के लिए क्युकी सबसे बड़ा दोस्त भी आप और सबसे बड़े दुश्मन भी आप। आप ही आपने आप को रोकोगे और आप ही आपने आप को आगे बढ़ाओगे। अपने आप से जीत जाओ ये दुनिया आपके सामने घुटने टेक देगी। रुको मत झुको मत बढ़ते रहो अपना काम करते रहो। लाख परेशानिया आये तो परेशानियों को बोल देना मेरा काम जरुरी है तू बाद में आना।
कामयाबी का तीसरा साथी है जूनून। आपमें जूनून कितना है आपके काम के लिए। क्या आप को आपके खुद के निर्णय पर पूरा विशवास है कि आप जो करने जा रहे हो वो सही है। दुनिया पहले आपको परखेगी टटोलेगी डराएगी इतरायेगी और फिर अंत में आपकी बात मान लेगी।
दुनिया वालो को नहीं पता की वो क्या चाहते है उन्हें बताओ की उनके लिए आप कितने सही हो आप उनके लिए क्या करने जा रहे हो। उनके इर्द गिर्द ऐसा एक सिस्टम खड़ा कर दो की वो आपके बिना हड़बड़ा जाये। जूनून ऐसा कर दो अपना की लोग आपको आपके नाम से नहीं आपके लक्ष्य से पहचानने लगे और जिस दिन आपने अपनी मंजिल को पा लिया ये दुनिया आपके पीछे पीछे तारीफ करती हुई चली आएगी।

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