मार्केटिंग आसान है।

रोष अपने सहपाठी सी.के. (CK) के साथ जुड़ गया, जो कि उसी की तरह एक इंजीनियर भी था, ताकि वे दोनों अपने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिज़नेस मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम का भार आपस में बाँट सकें|

रोष जानता था कि ये योग्यता उसके बायोडाटा (Biodata) में जुड़ने से उसकी विक्रेयता बढ़ेगी, लेकिन फुल-टाइम काम करते हुए फुल-टाइम पढ़ना भी एक चुनौती बन गया था|

क्योंकि सी.के. की क्वालिफिकेशन उसके जैसी ही थी, उसने अनुमान लगाया कि सी.के. ने भी उसके जैसी ही कोई पठन-नीति बनाई हुई होगी| तो उसके साथ जोड़ी बनाने में समझदारी थी|

कम से कम, साथ-साथ वे कुछ बार तो पढ़ ही सकते थे, और अगर दोनों को फायदा होता दिखा और जोड़ी सफल रही, तो यारी जारी भी रह सकती थी|

पहली मीटिंग के लिए लेक्चर के ठीक बाद, कॉलेज के खुले ऑडिटोरियम में मिलने का प्रोग्राम तय हुआ था| मार्केटिंग कॉन्सेप्ट्स पर पहला लेसन रोष को तैयार करके देना था|

सी.के. सभागार में सनी के साथ पहुँचा, क्योंकि रोष के साथ अपनी पढ़ाई के सेशन के ठीक बाद वह सनी के साथ फिल्म देखने जाने वाला था|

सनी भी उन दोनों का क्लासमेट था, और उसने अपनी बैचलर ऑफ़ आर्ट्स (बी.ए.) की डिग्री ख़त्म करने के बाद व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (PGDBM) करने के लिए दाखिला लिया था|

“मार्केटिंग आसान है,” रोष ने कहना शुरू किया| “आज, मैं सिर्फ मार्केटिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्दों से तुम्हारा परिचय कराऊंगा, और हम कुछ प्रासंगिक मगर हल्के-फुल्के उदाहरणों से उन्हें समझेंगे|”

“व्याख्यान में तुम में से किसी को, सबक में मेरा समझाया कुछ समझ न आया हो, या कोई और सवाल उठें, तो अध्ययन सत्र आगे चलेगा, नहीं तो पाँच मिनट में बर्खास्त हो जायेगा| तैयार?”

दोनों ने सिर हिला कर हामी भरी| ये बैठक दिलचस्प होने जा रहा थी| पहला अध्याय 43 पृष्ठ लंबा था, और रोष पांच मिनट में इसे कवर करने का वादा कर रहा था| इस गति से तो योग्यता का पूरा पाठ्यक्रम, हफ्ते भर में कर-करा के झाड़ दिया जाएगा।

रोष ने बोलना शुरू किया:

तुम्हें पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उसके पास जाकर कहते हो, “मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”
ये डायरेक्ट मार्केटिंग (Direct Marketing) है|

तुम दोस्तों के साथ एक पार्टी में हो, और तुम्हें एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम्हारा एक दोस्त उसके पास जाता है और तुम्हारी ओर इशारा करते हुए कहता है, “वो बहुत अमीर है| उससे शादी कर लो!”
ये विज्ञापन (Advertising) है।

तुम्हें पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उसके पास जाकर उसका टेलीफोन नंबर ले आते हो|
अगले दिन तुम उसे फोन करके कहते हो, “हेलो, मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी करोगी?”
ये टेलीमार्केटिंग (Telemarketing) है|

तुम एक पार्टी में हो, और तुम्हें एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उठते हो, अपनी टाई सीधी करते हो, उसके पास चलकर जाते हो, और उसके लिए ड्रिंक बनाते हो| उसके लिए दरवाज़े खोलते हो, उसके बैठने के लिए कुर्सियां पीछे खेंचते हो, अगर उसका पर्स गिर जाए तो उसे उठाते हो, उसे घर ड्राइव करके छोड़ने की पेशकश करते हो|
फिर लगभग बेख़याली में तुम उसे बताते हो, “वैसे, मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”
ये पब्लिक रिलेशन्स (Public Relations) है|

तुम एक पार्टी में हो, और तुम्हें एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
वो उठ कर तुम तक आती है और कहती है, “तुम बहुत अमीर हो| मुझसे शादी करोगे?”
ये ब्रांड की पहचान (Brand Recognition) है।

तुम्हें पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उसके पास जाकर कहते हो, “मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”
वो तुम्हारे गाल पर एक मस्त करारा थप्पड़ जड़ देती है|
ये ग्राहक प्रतिक्रिया (Customer Feedback) है !!

तुम्हें पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उसके पास जाकर कहते हो, “मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”
वह अपने पति से मिलवाती है तुम्हें|
ये मांग और आपूर्ति का अंतर (Demand and Supply Gap) है!

तुम्हें पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उसके पास जाते हो मगर इससे पहले कि तुम कुछ कह सको, कोई दूसरा उससे कह देता है, “मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”
वो उसके साथ चली जाती है|
ये है प्रतियोगिता (Competition)| तुम्हारी बाजार हिस्सेदारी (Market Share) में सेंध लगाती!

तुम्हें पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|
तुम उसके पास जाते हो, मगर इससे पहले कि तुम कह सको, “मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”
तुम्हारी बीवी आ जाती है|
ये है नए बाज़ारों में प्रवेश पर प्रतिबंध (Restriction on Entering New markets)!

तुम एक पार्टी में हो और खूबसूरत लड़कियाँ ताड़ रहे हो|
ये मार्केट रिसर्च (Market Research) है …

“क्या हो अगर,” सनी ने टोका, “आपको पार्टी में एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है|”
“आप इधर-उधर देख कर पक्का करते हो कि आस-पास आपको सुनने वाला कोई नहीं|”
“फिर आप उसके पास जाकर कहते हो, “मैं बहुत अमीर हूँ| मुझसे शादी कर लो!”

“ये ज़रूर जोखिम प्रबंधन (Risk Management) होना चाहिए!” सी.के. की सुरीली आवाज़ गूँजी|

‘ये मार्केटिंग का चुतियापा तो बहुत सरल है,’ सनी ने सोचा| उसकी खोपड़ी में अब हजारों मार्केटिंग विचार कुलबुला रहे थे|

साभार – अज्ञात
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8 Replies to “मार्केटिंग आसान है।”

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